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संघ यात्रा – व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित, सक्षम और सशक्त बनाना है, और इस दिशा में उसका कार्य निरंतर जारी है। यह केवल एक संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि भारत को समरस, समर्थ और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने का व्यापक प्रयास है।

जिला शिमला द्वारा होटल लैंडमार्क के सभागार में एक महत्वपूर्ण जन-संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसका शुभारंभ वंदे मातरम् के साथ हुआ।

कार्यक्रम में संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि संघ ने अपने 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर ली है। इस दौरान सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण की भावना के साथ संघ ने समाज के हर क्षेत्र में योगदान दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ की स्थापना विजयदशमी 1925 को स्वतंत्रता सेनानी एवं संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत को स्वतंत्र, सशक्त और संगठित बनाना था।

उन्होंने कहा कि संघ की दैनिक शाखाएं ऐसे व्यक्तियों का निर्माण कर रही हैं जो देशभक्ति से प्रेरित होकर समाजहित में कार्य करते हैं। संघ व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण दोनों पर समान रूप से बल देता है। समाज की प्रगति के लिए संगठन, सामूहिकता और सबको साथ लेकर चलना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने और समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ने का प्रयास करता है।

संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन और जीवन शैली है।आज भारत विश्व के प्रमुख देशों में अपनी पहचान बना रहा है और दुनिया को जीवन जीने की दिशा भी दिखा रहा है। संघ का लक्ष्य भारत को समरस, समर्थ और सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक मुद्दों, सेवा कार्यों, शिक्षा नीति, संस्कारों तथा संघ में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे गए, जिनका समाधान सह सरकार्यवाह जी ने विस्तार से किया।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर में एक लाख से अधिक सेवा प्रकल्प संचालित हो रहे हैं और इतने ही स्थानों पर शाखाएं एवं मंडलियां सक्रिय हैं। संघ के स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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